इन लक्षणों को हल्के में न लें, पड़ सकता है हार्ट अटैक
By Republic, 11:29:57 PM | September 04

नई दिल्ली
सीने में असहनीय दर्द को हार्ट अटैक की पहली चेतावनी माना जाता है। हालांकि, यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल बर्मिंघम के हालिया अध्ययन की मानें तो ब्रिटेन में हर साल सामने आने वाले हार्ट अटैक के 50 फीसदी मामलों में मरीज को सीने में दर्द की शिकायत ही नहीं होती। अलबत्ता उसे सुस्ती, थकान या कमजोरी की समस्या सताती है, जिसे परिजन बुखार, तनाव या अस्वस्थ खानपान का साइडइफेक्ट समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
जेरोम मेंट के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने ब्रिटेन में साल 2019 में दर्ज किए गए हार्ट अटैक के लगभग एक लाख मामलों का विश्लेषण किया। उन्होंने मरीज के खानपान, जीवनशैली, व्यायाम की आदत, सिगरेट-शराब की लत, उम्र, पारिवारिक पृष्ठभूमि और परिवार में हृदयरोग के इतिहास के अलावा हार्ट अटैक से पहले दिखे लक्षणों का ब्योरा जुटाया। सभी आंकड़ों पर नजर दौड़ाने पर पता चला कि लगभग 50 हजार मामलों में दिल का दौरा पड़ने से पहले मरीज को सीने में दर्द महसूस ही नहीं हुआ।
मेंट के मुताबिक ब्रिटेन ही नहीं, दुनिया के तमाम देशों में ‘साइलेंट म्योकार्डियल इनफैर्क्शन (एसएमआई)’ के शिकार मरीज बढ़ रहे हैं। ‘एसएमआई’ में मरीज हार्ट अटैक की आहट को भांप ही नहीं पाता। सीने या बाजू में अहसनीय दर्द, सांस लेने में तकलीफ और जरूरत से ज्यादा पसीना आने की शिकायत नहीं उभरना इसकी मुख्य वजह है।
मेंट ने बताया कि ‘एसएमआई’ के ज्यादातर मामले तब पकड़ में आते हैं, जब मरीज किसी सर्जरी के लिए भर्ती होता है और सामान्य जांच प्रक्रिया के तहत उसका ईसीजी किया जाता है। ईसीजी में हृदय कोशिकाओं को ठीक वैसी ही क्षति देखने को मिलती है, जैसी कि दिल का दौरा पड़ने से होती है। हालांकि, मरीज कहते हैं कि उनमें कोई स्वास्थ्य समस्या ही नहीं पनपी।
एक नजर ‘एसएमआई’ पर
सामान्य हार्ट अटैक की तरह ही ‘एसएमआई’ में भी धमनियों में फैट या कोलेस्ट्रॉल जमने के कारण हृदय में खून का प्रवाह ठप पड़ जाता है। इससे कोशिकाओं को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और वे दम तोड़ने लगती हैं। चूंकि, यह शुरुआती चरण होता है, इसलिए सीने में असहनीय दर्द, सांस लेने में तकलीफ और जबरदस्त पसीना आने की शिकायत नहीं सताती।
नजरअंदाज करना घातक
शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि ‘एसएमआई’ दिल की गिरती सेहत का संकेत है। इसे नजरअंदाज करने से व्यक्ति धमनियां जाम होने की समस्या घातक रूप अख्तियार कर सकती है। बड़ी संख्या में हृदयकोशिकाओं के नष्ट होने से व्यक्ति की जान तक जा सकती है। मोटापे, डायबिटीज, शारीरिक सक्रियता में कमी और परिवार में हृदयरोग के इतिहास से ‘एसएमआई’ का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
इन लक्षणों को हल्के में न लें
हृदयरोग विशेषज्ञों ने हर वक्त थकान, सुस्ती, कमजोरी महसूस होने की शिकायत को हल्के में न लेने की सलाह दी है। उन्होंने चलने-फिरने में होने वाली दिक्कत को भी लेकर सतर्क हो जाने के लिए कहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के लक्षण उभरने पर व्यक्ति को दिल की सेहत की जांच जरूर करवानी चाहिए। फास्टफूट, मीठे और तैलीय भोजन से परहेज करते हुए व्यायाम के लिए समय निकालना भी शुरू कर देना चाहिए।
जान जाने का जोखिम कम
विशेषज्ञों की मानें तो ‘एसएमआई’ का इलाज सामान्य दिल के दौरे जैसा ही होता है। मरीज को धमनियों में जमे थक्के निकालने वाले दवाएं खिलाई जाती हैं। उन्हें ऐसी दवाएं भी दी जाती हैं, जिनसे रक्तप्रवाह के दौरान हृदय पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। भविष्य में थक्के जमने से रक्त प्रवाह में बाधा न उत्पन्न हो, इसके लिए मरीजों की एंजियोप्लास्टी कर उनकी धमनियों में ‘स्टेंट’ भी डाली जाती है।
संकट
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक 1.79 करोड़ लोगों की जान हर साल हृदयरोगों से जाती है।
दुनिया में विभिन्न कारणों से होने वाली कुल मौतों का यह आंकड़ा 31% के करीब है।