(विशेष संवाददाता - प्रफुल्ल गोस्वामी)
राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) रेटिंग घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जेएनयू के एक प्रोफेसर समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये अधिकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को मनचाही A++ NAAC रेटिंग दिलाने के लिए रिश्वतखोरी में लिप्त थे। इस मामले में NAAC टीम के अध्यक्ष, आंध्र प्रदेश के कोनेरू लक्ष्मैया एजुकेशन फाउंडेशन (KLEF) के कुलपति और दो अन्य अधिकारियों को भी गिरफ्तार किया गया है।
*देशभर में CBI की छापेमारी, नकदी और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त*
CBI ने देश के 9 राज्यों में 20 ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें 37 लाख रुपये नकद, छह लेनोवो लैपटॉप, एक iPhone 16 Pro और कई अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए। रिश्वत के तौर पर दिए गए सोने, मोबाइल और अन्य महंगे सामान भी जब्त किए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के हवाले से खबर: NAAC रेटिंग घोटाले में गलगोटियास यूनिवर्सिटी पर संदेह, शिक्षा माफिया का अड्डा बनी निजी संस्थान
NAAC रेटिंग घोटाले के खुलासे के बाद पहले से A+ या A++ मान्यता प्राप्त कई विश्वविद्यालयों की साख पर सवाल उठने लगे हैं। खासतौर पर यमुना एक्सप्रेसवे स्थित गलगोटियास यूनिवर्सिटी, जो पहले भी इस तरह की गड़बड़ियों के लिए कुख्यात रही है, अब फिर से शक के घेरे में आ गई है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि इस घोटाले ने साबित कर दिया है कि भारत में कई निजी विश्वविद्यालय सिर्फ पैसे और प्रभाव के दम पर टॉप रैंकिंग हासिल कर रहे हैं, जबकि शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता नाम मात्र की है।
गलगोटियास में शिक्षा की हालत बदतर, छात्रों और फैकल्टी के लिए बना नर्क
NAAC रेटिंग में हेराफेरी तो एक पहलू है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, गलगोटियास यूनिवर्सिटी का असली चेहरा इससे कहीं ज्यादा डरावना है। इस संस्थान में छात्रों की कक्षाएं बिना किसी डर और प्रशासनिक हस्तक्षेप के लगातार चल रही हैं, जबकि शिक्षा के स्तर की कोई परवाह नहीं की जाती। छात्रों से मोटी फीस वसूली जाती है, लेकिन पढ़ाई का स्तर सरकारी कॉलेजों से भी खराब है।
फैकल्टी के शोषण का अड्डा
सूत्रों के अनुसार, इस संस्थान में सिर्फ छात्रों को ही नहीं, बल्कि फैकल्टी को भी शोषण का शिकार बनाया जाता है। शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं दिया जाता, कई बार महीनों तक सैलरी रोक दी जाती है। जो भी इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाता है, उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।
क्या शिक्षा माफिया के खिलाफ होगी कार्रवाई?
इस घोटाले ने दिखा दिया है कि सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, निजी विश्वविद्यालयों की साख को बनाने और बिगाड़ने का खेल अब शिक्षा के नाम पर महज एक व्यापार बन चुका है। गलगोटियास यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान सिर्फ डिग्री बांटने की फैक्ट्री बन चुके हैं, जहां असली शिक्षा की कोई जगह नहीं।
अब देखना यह होगा कि CBI और सरकार इस पर कोई ठोस कदम उठाती है या फिर मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा?