रेउसा/सीतापुर नगर में लक्ष्मीनारायण (झब्बू ) यज्ञसैनी परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह में शनिवार को रुक्मिणी विवाह प्रसंग व सुदामा चरित्र का वर्णन सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। वृन्दावन धाम से पधारे कथा व्यास अरुण शुक्ल जी महराज ने कथा का रसपान कराते हुए कहा कि विदर्भ के राजा भीष्मक के घर रुक्मिणी का जन्म हुआ। बाल अवस्था से भगवान श्रीकृष्ण को सच्चे हृदय से पति के रूप में चाहती थीं। लेकिन भाई रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल के साथ कराना चाहता था। रुक्मिणी ने अपने भाई की इच्छा जानी तो उसे बड़ा दुख हुआ। अत: शुद्धमति के अंतपुर में एक सुदेव नामक ब्राह्मण आता-जाता था। रुक्मिणी ने उस ब्राह्मण से कहा कि वे श्रीकृष्ण से विवाह करना चाहती हैं। सात श्लोकों में लिखा हुआ मेरा पत्र तुम श्रीकृष्ण तक पहुंचा देना। कथा व्यास ने बताया कि रुक्मिणी ने स्वयं को प्राप्त करने के लिए उपाय भी बताया। पत्र में रुक्मिणी ने बताया कि वह प्रतिदिन पार्वती की पूजा करने के लिए मंदिर जाती हैं, श्रीकृष्ण आकर उन्हें यहां से ले जाओ। पत्र के माध्यम से रुक्मिणी ने कहा कि मुझे विश्वास है कि आप इस दासी को स्वीकार नहीं करेंगे तो मैं हजारों जन्म लेती रहूंगी। मैं किसी और पुरुष से विवाह नहीं करना चाहती हूं। कथा व्यास बताया कि पार्वती के पूजन के लिए जब रुक्मिणी आई, उसी समय प्रभु श्रीकृष्ण रुक्मिणी का हरण कर ले गए। अत: रुक्मिणी के पिता ने रीति रिवाज के साथ दोनों का विवाह कर दिया। इंद्र लोक से सभी देवताओं द्वारा पुष्पों की वर्षा की तथा खुशियां लुटाई। इस अवसर पर हिमांशु, राकेश, अशेष श्रीवास्तव, सुधीर तिवारी, कृष्ण स्वरूप पाण्डेय, विपिन सिंह, सन्दीप मिश्र, पंकज बाजपेई, मोनू पाण्डेय, आशुतोष मिश्र, गुरुदीन गुप्ता, शिवपूजन, हिमांशु, दुर्गेश पोरवाल, गुंजन विशाल पोरवाल, शिवकुमार गुप्ता, राहुल मिश्रा सहित सैकडो भक्त गण उपस्थित रहे ।