कृति और कृतिकार संवाद का पांचवां आयोजन नोएडा में संपन्न
By Har Govind Singh, 09:19:12 AM | March 17

नोएडा :-'कृति और कृतिकार' संवाद - पांच का आयोजन कथाकार महेन्द्र भीष्म अपने साहित्यकार पिता पण्डित बृजमोहन अवस्थी की स्मृति में विगत वर्ष अक्टूबर, 2023 से कर रहे हैं। दिनाँक 16 मार्च, 2024 को स्थानीय नोएडा मीडिया क्लब, सेक्टर 29, नोएडा में इस श्रृंखला का पांचवां आयोजन संपन्न हुआ।
'कृति और कृतिकार' जिसमें अधिकतम चार महिला साहित्यकार एवं चार पुरुष साहित्यकार अपनी नवीन प्रकाशित कृति से पाठकों को न केवल परिचित कराते हैं अपितु अपनी रचनाधर्मिता, साहित्यिक, सामाजिक प्रतिबद्धता पर बोलते हुए पाठकों की जिज्ञासा को शांत एवं उनके प्रश्नों के उत्तर देते हैं। इसप्रकार कृतिकारों का पाठकों से संवाद भी स्थापित होता है। इस आयोजन का एक प्रमुख उद्देश्य नव रचनाकारों को ख्यातिलब्ध रचनाकारों के साथ मंच साझा करने का अवसर देना भी है।
संवाद-पांच में कृतिकारों ने अपनी कृतियों एवं रचनाधर्मिता के बारे में बताया । कृतिकार के रूप में क्रमश: वरिष्ठ कवि व चिंतक राजेश्वर वशिष्ठ, उपन्यासकार सुभाष अखिल, उपन्यासकार विवेक मिश्र, कहानीकार श्रीगोपाल सिंह सिसोदिया एवं कहानीकार रिंकल शर्मा बतौर 'कृतिकार' उपस्थित रहे।
पांचों 'कृतिकारों' ने अपनी कृतियों के माध्यम से अपनी-अपनी कृतियों पर प्रकाश डालते हुए अपनी रचनाधर्मिता पर बात रखी। इसके पूर्व काव्या पब्लिकेशन से प्रकाशित पंडित बृजमोहन अवस्थी कृत 'बुंदेलखंड का सेनापति महल' के तीसरे संस्करण का लोकार्पण हुआ, जिसका संपादन डॉक्टर रिंकी रविकांत एवं सुश्री वैष्णवी अवस्थी द्वारा किया गया है।
उपस्थित पांचों साहित्यकारों को 'कृति और कृतिकार सम्मान' से अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। संपादक एवं समालोचक सुधेंदु ओझा का कृतिकारों के वक्तव्य के आधार पर उनके कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर बोलते हुए समग्र कार्यक्रम पर अपनी सकारात्मक राय रखी। आपका समीक्षात्मक वक्तव्य सराहनीय रहा। संवाद-पांच का सफल संचालन साहित्य एवं कला के अध्येता डॉक्टर विशाल पाण्डेय द्वारा किया गया।
श्री अनिल उपाध्याय अध्यक्ष, राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं शिक्षा संघ भारत द्वारा सुप्रसिद्ध लेखिका चंद्रकांता के अध्यक्षीय उद्बोधन के बाद धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
सुश्री रिंकल शर्मा ने अपने हास्य नाटक 'बुरे फंसे' की चर्चा करते हुए कहा कि, " वे कई वर्षों से रंगमंच से जुड़ी रही हैं तभी से उनकी इच्छा नाटक लिखने की रही। तउन्होंने अपनी नाट्य कृति 'बुरे फंसे' के बारे में बताया कि 170 पेज के इस हास्य नाटक का कथानक वर्षों पहले से उनके मन-मस्तिष्क में चल रहा था।" रिंकल ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज के नव रचनाकार अपने से बड़े व स्थापित रचनाकारों से मिलने या बात करने में झिझकते नहीं हैं।
कहानीकार श्रीगोपाल सिंह सिसोदिया ने किन्नरों के जीवन संघर्ष पर आधारित अपने कहानी-संग्रह "प्रेम पियासे नैन" की कहानियों की चर्चा करते हुए किन्नरों के जीवन-संघर्ष पर प्रकाश डाला। दिल्ली प्रशासन में राजपत्रित अधिकारी पद पर कार्यरत श्रीगोपाल ने आगे कहा कि किन्नर भी लैंगिक दिव्यांग होते हैं और दिव्यांग दया के पात्र नहीं हैं। उन्होंने स्वयं अपनी दिव्यांगता का उदाहरण देते हुए कहा कि हर समस्या का समाधान होता है।
समकालीन कथा साहित्य के अग्रणी लेखक उपन्यासकार विवेक मिश्र ने अपने उपन्यास "जन्म-जन्मांतर के कथानक पर प्रकाश डालते कहा कि "उपन्यास दो मित्रो की दो जन्मों की कहानी है। वे मूलतः: कहानियां लिखते हैं, परंतु इस उपन्यास के कथानक को कहानी में समेटा नहीं जा सकता था, अत: कहानी के स्थान पर यह उपन्यास के रूप में आया। विवेक ने आगे कहा कि लेखक को लिखने का हौसला अपने पाठकों से मिलता है" हानिया जैसी अनेक चर्चित कहानियों के लेखक एवं पेशे से दंत -चिकत्सक विवेक मिश्र का यह दूसरा उपन्यास है जिसे सामयिक प्रकाशन ने प्रकाशित किया है।
किन्नर विमर्श पर आधारित अपने उपन्यास "दरमियाना" से चर्चित उपन्यासकार सुभाष अखिल ने प्रलेक प्रकाशन से प्रकाशित अपने उपन्यास "नंगे शहर का सफरनामा" के कथानक और उसको लिखने के कारण बताते हुए अपनी रचनाधर्मिता पर विस्तार से प्रकाश डाला, जो नि:संदेह नव रचनाकारों के लिए प्रेरक है। उन्होंने अपने वक्तव्य में कथाकार महेन्द्र भीष्म को साधुवाद देते कहा कि वे अपने साहित्यकार पिता पंडित बृजमोहन अवस्थी की स्मृति में इस आयोजन को आयोजित कर सराहनीय कार्य कर रहे हैं, जो साहित्यकारों एवं विशेषकर हिंदी साहित्य के हित में अपना अभूतपूर्व योगदान है।
कवि एवं चिंतक राजेश्वर वशिष्ठ द्वारा अपने खंड;काव्य "अगस्त्य के महानायक श्रीराम" की चर्चा करते हुए उसके प्रमुख अंशों का जिक्र करते हुए कहा कि इस खंड काव्य में उन्होंने श्री राम को मुख्य रूप से केंद्र में रखा है।
भीड़ का इकठ्ठा होना और साहित्य मनीषियों का इकठ्ठा होना, बिल्कुल अलग होता हैं, एक हाँकने के लिए होती है, दूसरा हाँकने के लिए होता है।
निष्कर्ष यह रहा कि साहित्य धंधा और धर्म के बीच का झूलता हुआ पुल है। इसे बचाये रखना और सावधानी के साथ इस पर चलना ही साहित्यकार की साधना है।
इस अभिनव साहित्यिक कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रवासी भरतीय श्री विकास गुप्ता सीईओ रेजीलिएंसी प्रोग्राम, श्री प्रफुल्ल गोस्वामी, कवयित्री डॉक्टर सीमा वत्स, किन्नर विमर्श पर शोध के बाद प्रथम शोधकर्ता हैं डॉक्टर वीना सिंह जिन्हें सर्वप्रथम किन्नर विमर्श पर डॉक्टर की उपाधि प्राप्त हुई।,पत्रकार विनय सिंह, अधिवक्ता श्री महेश सागर, सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता श्री सी के श्रीवास्तव सहित देश की राजधानी दिल्ली एवं एन सी आर से आए अनेक गणमान्य व विज्ञ जनों की सभा कक्ष में उपस्थित रही।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं 'व्यास सम्मान' से सम्मानित सुप्रसिद्ध कथाकार चंद्रकांता ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सभी कृतिकारों की सराहना करते हुए, उन्हें प्राप्त सम्मान के लिए बधाई दी और "कृति और कृतिकार" के आयोजन एवं इसकी संकल्पना के लिए कथाकार महेन्द्र भीष्म की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने संवाद - पांच के आज के आयोजन को भी सफल बताया।
रेजीलियंसी प्रोग्राम के सीईओ श्री विकास गुप्ता इस साहित्य समागम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
धन्यवाद ज्ञापन राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं शिक्षा संघ के अध्यक्ष एवं संवाद - 5 के संयोजक श्री अनिल उपाध्याय द्वारा दिया गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन साहित्य व कला के अध्येता विशाल पाण्डेय द्वारा किया गया जबकि कृतिकारों से वार्ताकार की भूमिका में कथाकार महेन्द्र भीष्म स्वयं रहे।