ब्लड से जुड़ी समस्याओं में समय काफी अहम, एडवांस ट्रीमटेंट प्रक्रिया से हो रहा सफल इलाज*
By Ajab, 10:17:29 PM | January 27

*ब्लड से जुड़ी समस्याओं में समय काफी अहम, एडवांस ट्रीमटेंट प्रक्रिया से हो रहा सफल इलाज*
हरियाणा/हिसार : मेडिकल टेक्नोलॉजी में हुई तरक्की ने ब्लड से जुड़ी समस्याओं के इलाज को सफल बना दिया है. ब्लड से जुड़ी समस्याओं जैसे- ल्यूकेमिया, मल्टीपल मायेलोमा, अप्लास्टिक एनीमिया, थैलेसीमिया मेजर समेत कैंसर के मामलों में भी बीएमटी से सफल इलाज किया जा सकता है. बीएमटी प्रक्रिया में सक्सेस रेट कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी जैसी परंपरागत थेरेपी से ज्यादा है. ब्लड कैंसर एक जानलेवा कैंसर माना जाता है. इसी के मद्देनजर लोगों मे जागरूकता अवेयरनेस फैलाने लाने के लिए हिसार में एक सत्र आयोजित किया गया. फोर्टिस गुरुग्राम पिछले चार सालों से ऐसा कर रहा है, साथ ही अपनी ओपीडी सेवाएं भी दे रहा है. इस अवेयरनेस जागरूकता सत्र सेशन में लोगों को बताया गया कि समय पर इलाज कितना महत्वपूर्ण है, और फोर्टिस गुरुग्राम में क्या क्या आधुनिक सुविधाएं मौजुद उपलब्ध हैं.
ब्लड से संबंधित समस्याओ जुड़ी दिक्कतों के लिए ओपीडी सेवाओं के पिछले चार वर्षों के दौरान, इस क्षेत्र के 1280 से अधिक लोगों ने ओपीडी सेवाओं का लाभ उठाया है. इनमें से 40 % लोग (500 से अधिक लोग) किसी न किसी प्रकार के ब्लड कैंसर से पीड़ित पाए गए हैं. पिछले चार वर्षों में 20 मरीजों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट हुआ है जबकि अन्य मरीजों को दवाईयों से ही ठीक कर दिया गया है.
जिन मरीजों का बीएमटी प्रक्रिया के तहत सफल इलाज हुआ वो भी इस जागरूकता सत्र अवेयरनेस सेशन के दौरान मौजूद रहे. इनमें हिसार की 46 साल की कांता देवी भी रहीं, जिन्हें मल्टीपल मायलोमा था और उनका बीएमटी से सफल इलाज किया गया. इनके अलावा 40 वर्षीय कामना धमीजा का हैपलो (हाफ मैच) बीएमटी ( बोन मैरो ट्रांसप्लांट) किया गया, उन्हें मायलोइड ल्यूकेमिया था. जबकि 16 साल के मास्टर अभिषेक की भी सफल बीएमटी की गई. अभिषेक को गंभीर अप्लास्टिक एनीमिया था. इन सभी मरीजों ने अपने एक्सपीरियंस शेयर किए और ये भी बताया कि फोर्टिस हॉस्पिटल गुरुग्राम की हेमोटोलॉजी टीम ने किस तरह बीमारी से लड़ने में उनकी मदद की.
*फोर्टिस अस्पताल गुरुग्राम में एडल्ट हेमोटो-ऑन्कोलॉजी एंड बीएमटी के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर मीत प्रीतमचंद ने कहा*, ’’पिछले चार वर्षों के दौरान, हमारी टीम ने देखा है कि बहुत से लोग किसी न किसी प्रकार के ब्लड की समस्याओं से पीड़ित हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं. ओपीडी में आने वाले लोगों में से अधिकांश को अप्लास्टिक एनीमिया, थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया पाया गया. बोन मैरो ट्रांसप्लांट इस तरह के रोग के लिए अबतक एकमात्र उपलब्ध उपचार है. हमें बीमारों और भाई-बहनों का एचएलए परीक्षण करना होता है, यह देखने के लिए कि क्या वे एक आदर्श मैच हैं (25 से 30ः संभावना है कि एक भाई एचएलए पर रोगी के लिए एक पूर्ण मैच होगा). बाकी मरीजों के लिए डोनर तलाशे जाते हैं जिसमें अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्टेम सेल रजिस्ट्रियों के जरिए डोनर लिया जाता है. अगर किसी मरीज को परिवार से डोनर नहीं मिलता है, तब हम हाफ-मैच ट्रांसप्लांट करते हैं, जिसमें पिता या माता डोनर होते हैं.’’
*डॉक्टर मीत ने आगे बताया*, ’’हेमोटोलॉजी और स्टेम सेल ट्रांसप्लांटेशन के क्षेत्र में एडवांस तकनीक आने से बोन मैरो ट्रांसप्लांट सबसे बड़ा इलाज बनकर उभरा है जिससे मरीजों की जान बचाई जा रही है. बोन मैरो हड्डियों के अंदर का मुलायम वसायुक्त ऊतक होता है जो रक्त कोशिकाओं में फैलता है. इस पूरी प्रक्रिया को दो हिस्सों में बांटा गया है - एलोजेनिक (टिशू मैच वाला कोई भी डोनर) और ऑटोलॉगस (जहां स्टेम सेल एक ही शरीर से लिए जाते हैं). बीएमटी के दौरान क्षतिग्रस्त या नष्ट बोन मैरो को स्वस्थ बोन मैरो से रिप्लेस किया जाता है. इसमें डोनर के सेल्स से मैच मिलना सबसे मुश्किल चीज होता है. लेकिन हाल में हुई तकनीकी तरक्की की मदद से ये प्रक्रिया आसान हो गई है. हेप्लो-आइडेंटिकल ट्रांसप्लांटेशन में, अगर 50ः या उससे अधिक टिशू भी मैच हो जाते हैं तो बीएमटी सफलतापूर्वक किया जा सकता है. इस प्रक्रिया के चलते उन तमाम मरीजों को मदद मिली है जिन्हें बीएमटी की तत्काल जरूरत होती है.’’
इस सेशन में अस्पताल मैनेजमेंट की तरफ से बताया गया कि ल्यूकेमिया और लिम्फोमा के पीड़ित बहुत मरीजों को पहले डोनर से टिशू मैच का इंतजार करना पड़ता था, तभी उनकी बीएमटी हो पाती थी. इसके कारण गुजरते समय के साथ मरीज की परेशानी और बढ़ती रहती थी जो जानलेवा साबित होती थी. पिछले कुछ वक्त में हेमोटोलॉजी और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं. होप्लो-आइडेंटिकल ट्रांसप्लांटेशन तकनीक ने इंतजार को खत्म कर दिया है और अब तत्काल बोन मैरो ट्रांसप्लांट हो जाता है. प्रॉपर रिसर्च के साथ की जा रही बीएमटी प्रक्रिया के रिजल्ट काफी बेहतर आ रहे हैं.