सम्भल:-मियाजाकी आम दुनियाभर में अपनी कीमत के लिए मशहूर है। एक किलो मियाजाकी आम की अधिकतम कीमत लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये तक होती है। लेकिन भारत में उत्पादित मियाजाकी आम की कीमत बेहद कम होती है।
राजस्थान में आम के पेड़ को लगाना तो दूर, यहां पर गर्मियों में पानी के लाले पड़ जाते हैं। यहां गर्मी के सीजन में भीषण गर्मी पड़ती है। लेकिन आपको जानकर यह हैरानी होगी कि अब इसी राजस्थान में दुनिया के सबसे महंगे आम की भी खेती हो रही है। दरअसल, यहां के सीकर जिले के बेरी गांव में मियाजाकी आम की खेती हो रही है। इसे ‘ताइयो-नो-टोमागो’ या ‘एग्स ऑफ सनशाइन’ के नाम से भी जाना जाता है। मालूम हो कि मियाजाकी आम दुनियाभर में अपनी कीमत के लिए मशहूर है। एक किलो मियाजाकी आम की अधिकतम कीमत लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये तक होती है। वही मियाजाकी आम का नाम जापान के एक शहर ‘मियाजाकी’ के नाम पर रखा गया है। जहां इस आम की मुख्य रूप से खेती होती है।हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत में उत्पादित मियाजाकी आम की कीमत 2.5 से 3 लाख रुपये नहीं होती है। बल्कि कीमत इतनी कम होती है कि उसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते हैं।
मियाजाकी आम की खेती भारत में एक नॉर्मल वैरायटी के तौर पर हो रही है। एक तरह से यह कलर्ड यानी रंगीन वैरायटी है। इसके फल लाल और बैंगनी रंग के होते हैं। वही इसका एक फल 200-250 ग्राम होता है। चूंकि, यह कलर्ड वैरायटी है इसलिए देश के मंडियों में जो सामान्य किस्में होती हैं उनके तुलना में इसका कीमत डबल मिलता है। यदि बाजार में सामान्य आम की कीमत 100-150 रुपये किलो होती है, तो मियाजाकी आम की कीमत 200-250 रुपये होती है। ऐसा नहीं है कि एक किलो मियाजाकी आम देश में 2.5 लाख रुपये किलो बिकता है। जापान में हो सकता है कि इतना महंगा बिकता होगा। लेकिन भारत में उत्पादित आम इतना महंगा नहीं बिकता है। भले ही पौधे सेल करने के लिए नर्सरी मालिक बोल देते हैं कि 2.5 लाख रुपये किलो बिकता है।
मियाजाकी आम की खेती कैसी जलवायु में करें?
उन्होंने बताया कि अभी हमारे यहां का तापमान 47 डिग्री सेल्सियस है। लेकिन पौध और फलों पर इतना तापमान होने के बावजूद कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। फल भी बढ़ रहा है। फ़िलहाल फल का वजन 150 ग्राम से अधिक हो चुका है और रंग भी आना शुरू हो चुका है। जुलाई के अंत तक फल तैयार हो जाएंगे। वही, चिकनी और रतेली मिट्टी में भी इसकी खेती कर सकते हैं। हालांकि, खेती के दौरान किसान इस बात का ध्यान रखें कि मिट्टी और पानी का पीएच 6 से 8 के बीच हो। ऐसी स्थिति में पौधा बहुत तेजी से बढ़ता है। यदि मिट्टी और पानी में पीएच ज्यादा या कम होता है तो बढ़वार पर प्रभाव पड़ता है।