स्वतंत्र स्वरूप (ब्यूरो हरगोविन्द सिहॅं)
ग्रेटर नोएडा:- आज दिनांक 2- जुलाई 2024 को आईआईएमटी ग्रेटर नोएडा में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का स्थापना दिवस शिक्षकों ने मिलकर बनाया। डॉ राजीव किशोर पाण्डेय (सह-संयोजक मेरठ प्रान्त) ने कहा,शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास भारत में शिक्षा एवं संस्कृति के क्षेत्र में कार्य करने वाला न्यास है l शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी जी हैं। अतुल कोठारी जी भारत के प्रसिद्ध शिक्षाविद् हैं जो शिक्षा बचाओ आंदोलन समिति के राष्ट्रीय सह-संयोजक तथा भारतीय भाषा मंच के संरक्षक हैं।न्यास का उद्देश्य वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को नया विकल्प देना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए न्यास शिक्षा के पाठ्यक्रम, प्रणाली, विधि और नीति को बदलने तथा शिक्षा के 'भारतीयकरण' को आवश्यक मानती है। नई शिक्षा नीति को लागू कराने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके प्रति विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, विद्यालयों और आम लोगों में जागरूकता लाने के लिए कई तरह के कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
किसी भी राष्ट्र के उत्थान की आधारशिला शिक्षा होती है। देश में पहली बार शिक्षा में व्याप्त विसंगतियों को दूर करते हुए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लाई गई। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में एनसीईआरटी की किताबों का सरलीकरण किया गया है। हमारी सनातन संस्कृति हमारे व्यक्तित्व में होनी चाहिए।जैसे योग करना, प्रार्थना करना, परोपकार की भावना रखते हुए राष्ट्रहित और सामाजिक हित में कार्य करना।
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का उद्देश्य छात्रों में सनातन संस्कृति के विषयों द्वारा अनुशासन, चरित्र निर्माण , पर्यावरण, भाषा, राष्ट्रहित की भावना को जागरूक करना है। अगर देश को विश्व गुरु बनाना है, तो देश की शिक्षा को बदलना जरूरी है। नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में शिक्षकों की बहुत बड़ी भूमिका है। शिक्षा नीति का क्रियान्वयन और आत्मनिर्भर भारत में शिक्षा संस्थानों की प्रमुख भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है। हम सब एक साथ मिलकर कार्य करें। तो देश को विश्व गुरु बनाने से कोई रोक नहीं सकता।भारत की शिक्षा, भारत की संस्कृति, प्रकृति एवं प्रगति के अनूरूप हो, इस उद्देश्य के साथ शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का कार्य विस्तार आगे बढ़ता चला जा रहा है। शिक्षा सिर्फ पेट भरने के लिए जरूरी नहीं, शिक्षा में सदाचार, सद्भाव और सद्व्यवहार होना आवश्यक हैं। शिक्षा जीवन पर्यंत जरूरी है। देश को बदलना है। तो शिक्षा को बदलो। डॉ कमलेश शर्मा ने कहा,शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का उद्देश्य छात्रों में सनातन संस्कृति के विषयों द्वारा अनुशासन, चरित्र निर्माण , पर्यावरण, भाषा, राष्ट्रहित की भावना को जागरूक करना है। अगर देश को विश्व गुरु बनाना है, तो देश की शिक्षा को बदलना जरूरी है। नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में शिक्षकों की बहुत बड़ी भूमिका है। शिक्षा नीति का क्रियान्वयन और आत्मनिर्भर भारत में शिक्षा संस्थानों की प्रमुख भूमिका निभाते हुए देश में सामाजिक परिवर्तन और आधारभूत परिवर्तन के लिए हम सब एक साथ मिलकर कार्य करें तो देश को विश्व गुरु बनाने से कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने कहा समस्या नहीं समाधान पर चर्चा करो क्योंकि मां, मातृभूमि और मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं हो सकता।
कार्यक्रम में डीन प्रोफेसर जयंत शेखर,विभागाध्यक्ष प्रो बृजेश राज, कुलसचिव श्री विनोद कुमार कार्यक्रम संयोजक डॉ कमलेश कुमार शर्मा एवं डॉ सूर्यकांत, शैलेश सिंह, प्रतीक्षा गुप्ता, प्रीति कश्यप, डॉ संगीता सिंह, डॉ अर्चना वर्मा, मोनिका गोयल, पंकज चौहान, आकाश सोलंकी, सुषमा कुमारी एवं अन्य सहयोगीगण उपस्थित रहे
अंत में डॉ कमलेश शर्मा ने समस्त शिक्षकों का कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए का आभार व्यक्त किया।