आज दिनांक 9 मार्च 2024 दिन शनिवार को प्रेरणा मासिक गोष्ठी प्रतीक विस्टीरिया सेक्टर 77 , नोएडा में आयोजित की गई।
By Har Govind Singh, 06:03:38 PM | March 10

नोएडा :- माननीय श्री सतीश जी - संघ चालक भाग -1 नोएडा महानगर ने कहा कि युद्ध अब हथियारों ,बाहुबल के बल पर कम ,बौद्धिक स्तर पर अधिक लडा जा रहा है।अतः सजग नागरिकों को सशक्त विषयवस्तु और तथ्यों के बल पर इन बौद्धिक युद्ध में प्रतिभाग के लिए तत्पर रहकर विजय का संकल्प करना होगा।
माननीय श्री कृपाशंकर जी - प्रचार प्रमुख , उत्तराखण्ड एवं उत्तरप्रदेश ने कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण,स्वच्छता की महत्ता समझा कर ,लव जेहाद जैसे कोढ़ को भी समूल नष्ट करने के लिए प्रेरित किया।उन्होंने टूलकिट, टुकड़े टुकड़े गैंग,सम्मान वापसी आदि से निपटने की तैयारी का महत्त्व समझाया। उन्होंने प्रेरित करते हुए कहा कि जैसे धावक अपनी संपूर्ण क्षमता अंतिम कुछ सेकंड में झोंक देता है ,ऐसे ही आज के समय विश्राम करने की अपेक्षा पूर्ण मनोयोग से अपने ध्येय की ओर अग्रसरित होने के लिए संकल्पित हों।
सत्येंद्र नारायण जी - कार्यवाह , नोएडा महानगर ने कहा की हमारे विचार मौलिक हों,प्रेरक हों। हमे सोचना चाहिए कि कैसे तथ्यों पर आधारित विचारों को समाज में संप्रेषित करें।
श्री तपन जी , क्षेत्रीय सह प्रचार प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने " चुनौती और हम " विषय पर अपने संबोधन में सांस्कृतिक मार्क्सवाद और बाजारवाद के खतरे से अवगत करवाया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इन्हीं के कारण यूनान ,मिस्र और रोम की संस्कृति मिटा दी गई थी। कार्ल मार्क्स ने मार्क्सवाद का सिद्धांत देकर मजदूरों के संघर्ष और सर्वहारा वर्ग की सत्ता के लिए संगठित होकर लड़ने का प्रेरणा सूत्र दिया। रूस की क्रांति किसानों ने की। यद्यपि तत्पश्चात यूरोप के एक वर्ग में वामपंथी से मोह भंग शुरू हुआ। जर्मनी की फ्रैंकफर्ट विचारधारा राष्ट्र की संस्कृति को नष्ट करने पर बल देती है। आजकल दुश्मन राष्ट्र केवल भूभाग पर कब्जा नहीं करेंगे ,अभी तो मस्तिष्क पर भी कब्जे का प्रयास करेंगे। कार्ल मार्क्स के प्रेरक जर्मन नागरिक हेजल ने थीसिस एंटीथेसिस और सिंथेसिस के विचार को बढ़ावा दिया। उदाहरणनार्थ जैसे ब्रेड जो भूख को मिटा सकता है उसमें मैदे की अनुपयोगिता बता कर भाव उसके विरुद्ध किए गए और फिर ब्राउन ब्रेड के विचार को प्रचारित प्रसारित किया। तत्पश्चात ब्राउन ब्रेड में कैलोरी की अधिकता दिखाकर और फिर ओट्स को जनता को भोजन में सम्मिलित करने को प्रेरित किया।
केजरीवाल जैसे नियो लिबरल्स और शहरी साम्यवादियों ने सोचा किसी भी व्यवस्था पर प्रश्न उठाने से अव्यवस्था आएगी और अव्यवस्था आएगी तो अपना सिस्टम ला पाएंगे यही उनका मूल मंत्र है। लुकास का एक प्रयास था कि प्राचीन संस्कृति और परंपरा नष्ट हो जाए, सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र ने 3 आर की विषयवस्तु प्रतिपादित की। साम्यवादियों ने तमिलनाडु के तूतीकोरिन स्टरलाइट कंपनी के कैफेटेरिया में सिर्फ इडली के साथ वडा नहीं देने पर मजदूरों को भड़काकर उपद्रव करवाया गया जिससे भारतवर्ष तांबे के उत्पादन में आत्मनिर्भर से परावलंबी बन गया। कॉविड की प्रथम लहर जनसंख्या क्षति का प्रयास था,जो आगे भी विभिन्न स्वरूपों में हानि का कारण बनेंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली राजधानी क्षेत्र के अशोक विश्वविद्यालय में राम मर्यादा पुरुषोत्तम कैसे हो सकते हैं इस विषय पर शोध प्रबंध लिखा जा रहा है। उनका मानना है कि जो राजा धर्मपत्नी का परित्याग कर दे वह पुरुषोत्तम कैसे हो सकता है। जादवपुर विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में महिषासुर का वध करने वाली उच्च कुल की महिला का विरोध करने का प्रयास किया जाता है।
इस्लाम और ईसाई धर्म को सेवा और शांति का प्रतीक बताया जाता है, जबकि हिंदुओं को पितृ सत्तावादी , अति पिछड़े तथा रूढ़िवादी बताया गया। उन्होंने कहा भारतवर्ष की सभ्यता संस्कृति का अध्ययन करने के लिए सर्वे आफ इंडिया की स्थापना की गई। तत्पश्चात 1784 में एशियाटिक सोसाइटी ऑफ इंडिया की स्थापना के 40 वर्ष प्रचार तक भी कोई भारतीय सदस्य नहीं था। सर विलियम ने भारतीय इतिहास लिखा। उन्होंने ही इतिहास की तीन शाखाएं प्राचीन मध्यकालीन तथा आधुनिक इतिहास को प्रतिपादित किया। मैकाले की अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली का भारतीय शिक्षा पर कुप्रभाव आदरणीय गांधीवादी धर्मपाल जी ने धर्मपाल सामग्र पुस्तक में तथ्यों के आधार पर प्रकाशित किया है।
वैश्विक बजरी शक्तियां व्यक्तिवाद धर्मनिरपेक्षता, वैज्ञानिक वाद यानी इस्लाम के विरोध के शुरुआत का कारण बनी। 30 वर्षों तक विदेश के कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट शाखाओं में संघर्ष छिड़ा ,जिसे पोप ने फिलिया की संधि का नाम लेकर खत्म करवाया। संयुक्त राष्ट्र अमेरिका जैसा सशक्त राष्ट्र भी रंग भेद और सांस्कृतिक प्रभुत्व से अछूता नहीं रहा।
बिल गेट्स ने दावोस की बैठक में अगले 1 वर्ष में महामारी के आगमन की भविष्यवाणी कर दी थी ।बिल गेट्स द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर पोलियो ड्रॉप्स को बताकर नपुंसकता बढ़ाने का आरोप है और मामला भारतवर्ष के सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। पूंजीवाद के खतरों का उल्लेख करते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कंपनी के सलाहकार जॉन पर्किन के बारे में बताया जिनकी सुप्रसिद्ध पुस्तक एक अर्थशास्त्री के बयान मे कुवैत, पनामा, वियतनाम आदि के पतन को विस्तार से प्रकाशित किया।
तपन जी ने कहा के रॉक फेलो फाउंडेशन जो अखिल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में फंड्स उपलब्ध कराई लेकिन यह शर्त रख दी के वहां सिर्फ एलोपैथी को बढ़ावा दिया जाएगा। यही कारण है कि अब स्वामी रामदेव एक कानूनी खतरे का सामना कर रहे हैं। कंपनियां बीज उत्पादन में तभी सहायक होती है जब खाद भी उनसे खरीदी जाए।
नीति हस्तक्षेप का एक प्रत्यक्ष उदाहरण है उत्तर प्रदेश का सारा स्वास्थ्य प्रबंधन डिलाइट कंपनी के पास है ।मैक्स हॉस्पिटल श्रृंखला का समस्त स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेज हैक कर लिए गए थे। और हैक करने का एकमात्र उद्देश्य था कि भारतवर्ष के आम नागरिक किस दवाई से कैसा महसूस करते हैं ,कौन सी दवाई क्या असर कर रही है। 1998 में जिनेवा में हुई एक कांफ्रेंस का यक्ष प्रश्न था की क्या कारण है कि विदेशी कंपनियां केवल तीन से चार प्रतिशत भारतीय बाजार को अपने कंट्रोल में ला पाई।
चीन के बाजारीकरण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि रिचर्ड गैरे नामक अमेरिकी नायक को मिट्टी में मिलाने वाले चीन के साम्यवादी विचारधारा के पोषक व्यापारी थे। उन्होंने कहा कि भारतवर्ष के भी फिल्म उद्योग टीवी उद्योग में आजकल विवाहेत्तर संबंधों ,ड्रग्स ,ओटीटी प्लेटफॉर्म आदि का ही बोल वाला है। उधर आमिर खान की एक फिल्म सुपरस्टार ने भारतवर्ष में सिर्फ 16 करोड़ का व्यापार किया लेकिन चीन में 3000 करोड रुपए का व्यापार किया। जिसमें से 2000 करोड रुपए आमिर को दिए गए लेकिन एक शर्त के साथ उन्हें बताया गया कि किसी गैर सरकारी संस्था को कितने पैसे उन्हें देने पड़ेंगे।
30 नवंबर से 2 दिसंबर 2013 के बीच में तीन विदेशी नागरिकों ने भारतवर्ष के उत्तर पूर्व के राज्यों में आम नागरिकों को समझाया कि यह तेल के भंडार आपके संसाधन है जिनका उपयोग उत्तर भारत के नागरिकों के लिए किया जा रहा है। जो नहीं होना चाहिए। आपको विदित होगा 2017 में एलगर परिषद ने कोरेगांव को भीमा कोरेगांव बनाकर मराठा और महार और समाज की कुलीन जातियों के बीच विद्वेष की खाई बनाने का कार्य किया। ऐसे ही राहुल गांधी आजकल अपनी सभाओं में आदिवासी और वनवासियों में फर्क बढ़ा कर दक्षिण और उत्तर का भेद बता कर अराजकता फैलाना चाहते हैं। आपको विदित होगा कि विदेश के एक व्यापारी जॉर्ज सोरोस ने 100 करोड रुपए सिर्फ अराजकता को बढ़ावा देने के लिए ही दिए हैं।
इन सभी समस्याओं का एक ही उत्तर है वह है ,सामाजिक समरसता का व्यवहार। हमें यह भान करना पड़ेगा कि मनुष्य सभी एक तत्व हैं, स्वका भाव जागृत करें ,आदर्श नागरिक का व्यवहार रखें ।रणनीति का ध्यान रखें। किसी भी घटना पर तत्काल प्रतिक्रिया न दें, थोड़ा सोच समझकर बुद्धि विवेक का उपयोग करके, तब प्रतिक्रिया दें। बौद्धिक योद्धा बने। 2034 -35 तक आधुनिक महाभारत में विजय प्राप्त करने के लिए के अपने व्यवहार में परिवर्तन लाएं। प्रतिभागियों को प्रेरित करने के लिए आदरणीय तपन जी ने हिंदू हृदय सम्राट भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई जी की कविता के कुछ पंक्तियां उद्धृत की हिंदू जीवन रग रग हिंदू मेरा परिचय तथा एक अन्य गीत शुद्ध हृदय की प्याली में आज कहे चाहे दुनिया कुछ भी ,कल झुके बिना नहीं रहेगी। ग्रामसे नमक पत्रकार ने गार्जियन के संपादकीय में लिखा था कि 16 मई ,2014 भारतवर्ष की असली स्वतंत्रता का दिवस है।
माननीय श्री रजत बागची जी , संघ चालक , संभाजी नगर , नोएडा, ललित बिहारी गोस्वामी जी विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान अध्यक्ष, अमरेश बहादुर सिंह जी विभाग संघचालक बरेली, जिज्ञासा जी हिंदू वाहिनी अध्यक्ष, रविंद्र गौतम जी वरिष्ठ अभियंता, प्रवीण जी केंद्रीय निर्माण विभाग, सरदाना जी,पंजाब नेशनल बैंक तथा समाज के 80 अन्य विद्वत जन आदरणीय तपन जी के संबोधन को श्रवण करने का पुण्य प्राप्त करने आए।