अगर कम तापमान पर एयर कंडीशनर चलाकर रहते हैं तो करना पड़ सकता है अनेक शारीरिक समस्याओं का सामना
By Har Govind Singh, 06:51:19 PM | May 27

गर्मी का मौसम चल रहा है और इस भयंकर गर्मी से प्रत्येक व्यक्ति परेशान है मध्यम और निचला वर्ग तो पंखा और कूलर से ही काम चला लेता है परंतु संपन्न लोग गर्मी के सीजन में एसी का इस्तेमाल कुछ ज्यादा ही करते हैं मई-जून में गर्मी अपने चरम पर रहती है और दिन प्रतिदिन बढ़ती ही रहती है।
गर्मी के मौसम में कुछ लोग गर्मी से राहत पाने के लिए एसी का इस्तेमाल करते हैं ऐसे लोग घर कार ऑफिस माल सभी जगहों पर एयर कंडीशनर यानी एसी में रहना पसंद करते हैं हर वक्त एसी में रहना धूप से आकर सीधे ऐसी के संपर्क में जाना ऐसी से सीधे धूप में जाना यह सब हमें किस तरह बीमार कर सकता है इस बात का अंदाजा प्रत्येक व्यक्ति को नहीं होता जितना ज्यादा इसी में रहेंगे
उतना बुरा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ेगा दरअसल एसी में रहने से शरीर की नमी कम होने लगती है जिससे कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है एसी में रहने से रूम टेंपरेचर और यूनिटी में अचानक बदलाव होता है इससे सूखापन होता है तथा रेस्पिरेट्री सिस्टम पर असर पड़ता है इस वजह से स्वास्थ्य संबंधित कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे नाक बंद होना बार बार छींक आना गला सूखना अस्थमा पेशेंट को ज्यादा परेशानी होती है
एसी की वजह से दूसरी भी कई दिक्कतें होती है जैसे आंखों में जलन सूखापन और धुंधला दिखाई देना शरीर का पानी सूख जाना माइग्रेन और सिरदर्द ज्यादा एसी में रहने से शरीर की नवमी खत्म होने से ठंडी और ड्राई हवा में वायरस और जल्दी पैदा होते हैं और खेलते भी हैं जिसकी वजह से यह नाक में घुस जाते हैं तो सूजन और इन्फेक्शन का कारण बनते हैं जिन्हें एलर्जी से जुड़ी कोई प्रॉब्लम है
उन्हें पूरा टाइम एसी में रहने से एलर्जी राइनाइटिस हो सकता है इसी से जुड़ी इस एलर्जी में सर्दी जुकाम सिरदर्द जैसी प्रॉब्लम हो सकती है इस इंफेक्शन को फीवर भी कहा जाता है पूरा दिन ऐसी चलने पर कमरे का दरवाजा खिड़की बंद रहती है जिससे वेंटिलेशन सही से नहीं हो पाता है ऐसे में दूषित हवा में सांस लेते रहते हैं एसी रूम की हवा को री साइकिल करता है
फ्लैश हवा में ऑक्सीजन के अलावा और भी कई कंपोनेंट होते हैं जिनके मैं मिलने पर घुटन महसूस होती है बिल्डिंग सिंड्रोम होने की वजह भी इस सिंड्रोम में सूखी खांसी नाक से खून आना इन्फेक्शन उल्टी जैसी परेशानियों हो सकती है कुल मिलाकर जब भी आपके शरीर को प्रॉपर वेंटीलेशन नहीं मिलेगा आपको कई तरह की प्रॉब्लम होगी। ठंडी और शुष्क हवा में रहने से पसीना कम निकलता है और आयल ज्यादा निकलने लगता है
जिससे मुंहासे समय से पहले झुर्रियां और त्वचा में जलन हो सकती है ज्यादा तापमान में रहने से स्किन के कोर्स तक बंद हो जाते हैं जिससे स्किन इंफेक्शन हो जाता है इसलिए हर समय ऐसी में रहने वाले लोग समय से पहले बुरे लगने लगते हैं घंटों एसी की ठंडी हवा में बैठने से शरीर का तापमान नीचे चला जाता है यानी लो हो जाता है इससे शरीर की कोशिकाएं और नशे सिकुड़ने लगती है ब्लड सरकुलेशन प्रभावित होता है यही ब्लड प्रेशर के ऊपर नीचे होने का कारण बनता है।
सही समय पर और सही तरह से एसी चलाने की जरूरत होती है अगर बीमार है तो ऐसी में नहीं रहना चाहिए इसके अलावा कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे धूप से आने के बाद सीधे हाई टेंपरेचर एसी वाले रूम में नए बैठे एसी में रहने के बाद जब तक शरीर का टेंपरेचर नॉरमल ना हो तब तक बाहर नहीं निकले साइंटिफिक तौर से मानव शरीर के लिए 24 डिग्री एसी का तापमान सही है 24:00 से कम तापमान सेहत के लिए सही नहीं है
एक्सपर्ट कहते हैं कि ऐसी की हवा इतनी बुरी नहीं है लेकिन जैसे ही हम इसे 16 से 18 डिग्री पर लाते हैं प्रॉब्लम होने लगती है इसलिए दिन के मुकाबले रात में टेंपरेचर कम 2 से 3 डिग्री कम कर सकते हैं एक बार एसी चलाकर कमरा ठंडा कर लें और फिर थोड़ी देर बाद ऐसी बंद कर दें पंखा और ऐसी साथ चलाया है तो टेंपरेचर ज्यादा ही रखें।
कोशिश करें कि कम ऐसी का इस्तेमाल करें नहाने से पहले रोजाना तेल से मालिश करें नाक में दो-दो बूंद घी या तेल डालें खाने में घी का इस्तेमाल करें खाने में पुदीने और सोफ इस्तेमाल करें।
एयर कंडीशनर सीधे तौर पर जान के लिए खतरा नहीं है लेकिन इस से ली हुई जहरीली गैस जानलेवा हो सकती है एसी का कंप्रेशर फटने की वजह से कई लोगों की जान जा चुकी है इसलिए अलर्ट रहें सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट में प्रोग्राम मैनेजर अभी कल सोमवंशी बताते हैं अभी भारत में जिस गैस का ज्यादातर इस्तेमाल हो रहा है वह हाइड्रो फ्लोरो कार्बन है एसी की गैस की कोई गंध नहीं होती है
कुछ परिस्थिति में ऐसा हो सकता है अगर ऐसी सही से फिट नहीं है जिन पाइपों में गैस जोड़ती है वह सही नए हो पुराने एसी की ट्यूब में जंग लग जाए जब ऐसी अच्छे से ठंडा नहीं कर रहा हो। तब एसी से गैस लीक होने के चांस ज्यादा रहते हैं।