हनुमान मन्दिर परिसर में सजे मॉ के पंडाल की भव्य आरती रही आकर्षण का केन्द्र
रेउसा सीतापुर /शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन शुक्रवार को मां भगवती के दूसरे रुप माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-उपासना की गई। दुर्गा मंडपों व मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है। दुर्गा सप्तशती के पाठ से वातावरण भक्तिमय हो गया है। रेउसा अटल चौक स्थित हनुमान मन्दिर परिसर में स्थित पूजा पंडाल की रौनक एवं मॉ के द्वितीय स्वरूप की आरती के लिए भक्तों की भीड उमडी थानाध्यक्ष रेउसा हनुमन्त तिवारी ने दरबार में दर्शन कर आरती की साथ ही क्षेत्र के सीपतपुर लाल पुर रामीपुर गोडवा खानी हुसेनपुर महन्तपुरवा रसूलपुर चन्दौली गंगापुरवा मुजेहना आदि पूजा पंडालो में मॉ की भक्ती में रमे दिखे गंगापुरवा पूजा पंडाल में वैदिक मण्डल के पुरोहित पं० विमल शास्त्री ने बताया माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा मनोरथ सिद्ध करने वाली है। उन्होंने कहा कि देवी ने भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इस देवी को तपश्चारिणी अर्थात् ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। मां दुर्गा की नवशक्ति का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानी तप का आचरण करने वाली। देवी का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है। इस देवी के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में यह कमण्डल धारण किए हैं। मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्वसिद्धि प्राप्त होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन देवी के इसी स्वरूप की पूजा की जाती है। इनकी उपासना से रोग, शोक और भय नष्ट हो जाते हैं। तिवारीपुर अटौरा में कथा व्यास अरुण शुक्ल ने भागवत भगवान का परिचय कराते हुए भागवत भगवान की महिमा का वर्णन किया तथा प्रसंग आधारित भजनों से भक्तों को मंत्र मुग्ध किया।