नौकरी छोड़कर खेती में कुछ नया करने का फैसला किया,मेरठ के अजय त्यागी
By Republic Times, 04:28:13 PM | December 29

मेरठ (Meerut) के प्रगतिशील किसान भी अजय त्यागी उन्हीं नौजवानों में से एक हैं जो ना केवल कामयाब तरीके से खेती करके शानदार कमाई कर रहे हैं बल्कि, अन्य किसानों को भी खेती से कामयाबी के मंत्र बता रहे हैं.
12 एकड़ जमीन में खेती की शुरूआत करने वाले अजय त्यागी आज 35 एकड़ में जैविक तरीके से दाल, अनाज, फल-सब्जी और मसालों समेत 60 से ज्यादा उत्पाद तैयार कर रहे हैं.
खेती करने से पहले अजय त्यागी गुरुग्राम स्थित प्रतिष्ठित मल्टीनेशनल कंपनी आईबीएम में पिछले 16 वर्षों से काम कर रहे थे. आईबीएम में नौकरी करते हुए उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर एक अलग ही मुकाम हासिल किया था. अजय को अपनी कामयाबी खूब रास आ रही थी.
अजय बताते हैं कि उन्होंने एमसीए किया और एक अच्छी कंपनी में करियर की शुरूआत की. वह लगातार आगे बढ़ रहे थे, लेकिन कुछ ऐसा था जो उन्हें पीछे खींच रहा था. आखिरकार उन्होंने नौकरी छोड़कर वापस गांव की ओर रुख किया.
अजय की परवरिश मेरठ शहर (Meerut City) में हुई. गांव में खेतीबाड़ी परिवार के अन्य लोग संभालते थे. उन्होंने नौकरी छोड़ जब खेती करने के फैसले के बारे में अपने परिवार को बताया तो परिजन काफी नाराज हुए.
अजय ने बताया कि नौकरी के दौरान वह प्रगतिशील किसानों के बारे में और सरकार की खेती को प्रोत्साहन देने वाली योजनाओं के बारे में पढ़ते रहते थे. इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़कर खेती में कुछ नया करने का फैसला किया. खेत में उतरने से पहले अजय से खेती के बारे में अध्ययन किया. कृषि वैज्ञानिकों से मिले. प्रगतिशील किसानों के साथ लंबी बैठकें कीं. इसके बाद उन्होंने गाजियाबाद स्थित राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र (National Centre of Organic Farming) में जैविक खेती के बारे जानकारी जुटाई. वहां रहकर कई कार्यशालाओं में शिरकत की.
राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र में अजय ने जैविक खेती के तरीके, जैविक उत्पादनों का प्रमाणिकरण और बाजार तक के बारे में ट्रेनिंग ली. इस ट्रेनिंग में अजय ने एक बात सीखी कि अगर खेती को खेती के तरीके से ना करके बल्कि, कारोबार की तरह से किया जाए तो निश्चित ही फायदा होगा.
अजय बताते हैं कि तमाम ट्रेनिंग लेने के बाद उनकी मुलाकात पद्मश्री से सम्मानित किसान भारत भूषण त्यागी से हुई. भारत भूषण त्यागी अजय के लिए प्रेरणा स्रोत बने.
कार्बनिक मिडोज प्रा. लिमिटेड (Karbanic Meadows India Pvt Ltd) नाम से एक कंपनी बनाई:
अजय ने बताया कि चूंकि वे खेत से खेती ना करके कारोबार करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने सबसे पहले ‘कार्बनिक मिडोज प्रा. लिमिटेड’ (Karbanic Meadows India Pvt Ltd) नाम से एक कंपनी बनाई. अजय यहां एक बात और जोड़ते हैं कि किसान दिन-रात खून-पसीना बहाकर खेती करता है, लेकिन खेती की लागत में कभी भी अपनी मेहनत और जमीन का मूल्यांकन नहीं करता. इसलिए खेती से होने वाले नफे-नुकसान का सही आकलन नहीं हो पाता है.
खेती को मुनाफे का कारोबार बनाने के लिए अजय ने सबसे पहले अपनी कंपनी के माध्यम से खुद अपनी ही खेती की जमीन को पट्टे पर लिया.
ग्राउंड जीरो से शुरूआत
अजय ने खेती के कारोबार को बिल्कुल नए सिरे से शुरू किया. नई शुरूआत के लिए पहले जमीन तैयार की. शुरू के छह महीने खेतों में सिर्फ जैविक खाद दिया, उत्पादन कुछ नहीं किया. समय-समय पर वैज्ञानिकों से मिट्टी की जांच करवाते रहे और जब खेत की मिट्टी नए सिरे से तैयार हो गई, तो उन्होंने खेती करना शुरू किया.
बाजार पर फोकस
अजय ने बताया कि जिस समय वह खेतों में फसल तैयार कर रहे थे उसी समय से उन्होंने बाजार के बारे में प्लान बनाना शुरू कर दिया था. फसल के जैविक प्रमाणिकरण का लाइसेंस लेना, उत्पाद की पैकिंग और उनकी बिक्री की पूरी तैयार कर ली.
प्रोसेसिंग और पैकिंग यूनिट
अजय ने फसल को काटकर सीधे बाजार में बेचने के बजाय उसकी प्रोसेसिंग की. इसके लिए उन्होंने मेरठ में ही एक प्रोसेसिंग और पैकिंग यूनिट लगाई और खेत से तैयार होने वाले जैविक उत्पादों की प्रोसेसिंग करके पैकिंग करने लगे. उन्होंने ‘कार्बनिक’ ब्रांड से ही अपने जैविक उत्पादों को बाजार में पेश किया.
सोशल मीडिया का सहारा
अजय ने जैविक उत्पादों की बिक्री के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया. इसेक लिए अपनी एक वेबसाइट तैयार की और उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री का इंतजाम किया. अजय बताते हैं कि ऑनलाइन मार्केटिंग की वजह से आज उन्हें प्रोडेक्ट गुरुग्राम, बैंगलुरु, मेरठ, दिल्ली समेत देश के कई बड़े शहरों में बिक रहे हैं.
मुनाफे की फसल
अजय बताते हैं कि जिन खेतों से उनके परिवार को कभी मुनाफा नहीं हुआ, केवल परिवार के लिए अनाज और लागत ही निकल पाती थी, उन्हीं खेतों से पहली ही फसल में उन्हें कमाई होने लगी. जहां किसानों को उनकी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं मिल पाता है, उन्हें एमएसपी से कहीं ज्यादा कीमत मिल रही है.
इस समय अजय से अपने फार्म हाउस में गाय भी पालनी शुरू कर दी हैं. गाय पालने से जहां उन्होंने दूध का काम शुरू कर दिया है, वहीं उन्हें गोबर की खाद भी मिल रही है. इसी खेती से वह केंचुआ खाद तैयार करके बाजार में बेचते हैं.
अजय अब अन्य किसानों को ट्रेनिंग देने का काम भी कर रहे हैं. इसके लिए वह देशभर में भ्रमण करके किसानों को आधुनिक खेती के गुर बताते हैं. अपने यहां भी किसान वर्कशॉप चलाते हैं और इसके लिए वह बकायदा किसानों से फीस भी लेते हैं. एक सलाहकार के रूप में भी वह अपनी सेवाएं देते हैं. किसानों को इसके लिए ऑनलाइन बुकिंग कराने के बाद एक निश्चित फीस भी अदा करनी होती है.
किसान बनें कारोबारी
अजय ने बताया कि सरकार का सारा ध्यान किसानों की तरक्की और खेती पर है. सरकार कोई भी योजना शुरू करे, उसमें खेती से जुड़े उत्पाद जरूर शामिल होते हैं. अजय कहते हैं किसानों को सरकार योजनाओं का फायदा उठाना चाहिए. वक्त साथ तकनीकों और तरीकों को भी बदलना चाहिए. उन्होंने बताया कि आज एक ऐसा बड़ा वर्ग भी जो शुद्ध चीजों के लिए कोई भी कीमत देने के लिए तैयार है.
अजय कहते हैं कि जब कोई कंपनी किसी मॉल में 100 ग्राम पॉपकॉर्न 150 रुपये में बेच सकती है और लोग खुशी-खुशी खरीदते भी हैं, तो किसानों को भी ऐसे उत्पाद तैयार करने चाहिए जिन्हें वे अपनी मर्जी की कीमत पर बेच सकें. किसानों को एमएसपी के भरोसे ना बैठकर तकनीक और बाजार की मांग पर फोकस करके खेती करनी चाहिए.