UP के दो बड़े दल आखिर क्यों कर रहे छोटे पार्टियों पर फोकस, जानें सियासी मायने
By Republic Times, 11:16:06 AM | December 01

UP के दो बड़े दल आखिर क्यों कर रहे छोटे पार्टियों पर फोकस, जानें सियासी मायने
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Vidhan Sabha chunav 2022) की बड़े दलों की तैयारियों पर गौर करें तो उनके राजनीतिक समीकरणों से उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में सक्रिय छोटे दलों की बल्ले-बल्ले होती नजर आ रही है. चुनाव की रेस में आगे चल रहीं दोनों प्रमुख पार्टियां बड़े दलों को अपने साथ जोड़ने की बजाय छोटे-छोटे दलों पर ही ज्यादा फोकस कर रही हैं. अभी भी भाजपा और सपा (BJP and SP) का जिन दलों से गठबंधन हुआ है उनमें से ज्यादातर छोटे-छोटे दल ही हैं.
पार्टी के प्रमुख नेताओं की ओर से भी यही बयान आ रहे हैं कि वे अपने कुनबे में छोटे दलों को शामिल करने के लिए उत्सुक हैं. अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने तो बाकायदा बयान देकर कहा है कि वह इस चुनाव को जीतने के लिए बड़े दलों के साथ गठबंधन नहीं बल्कि छोटे दलों के साथ अलायंस (Election alliance) पर ही ध्यान दे रहे हैं. ज्ञातव्य हो कि समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) पिछले चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन कर हार का स्वाद चख चुके हैं, इसीलिए शायद उनकी नीति में इस बार परिवर्तन आया है.
सपा का अभी तक इनसे हुआ गठबंधन
अखिलेश यादव (Akhilesh) की समाजवादी पार्टी ने महान दल (केशव देव मौर्य Keshav Dev Maurya ), जनवादी पार्टी (डॉक्टर संजय सिंह चौहान), सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी सुभासपा (ओमप्रकाश राजभर Omprakash Rajbhar), अपना दल कमेरावादी (कृष्णा पटेल Krishna Patel ), डेमोक्रेटिक पार्टी सोशलिस्ट, लेबर एस पार्टी, पॉलिटिकल जस्टिस पार्टी, भारतीय किसान सेना, सावित्री बाई फुले की कांशीराम बहुजन मूल समाज पार्टी, के साथ गठबंधन किया है. ये सभी छोटी पार्टियों की श्रेणी में ही आती हैं. इसके अलावा अखिलेश यादव की चर्चा राष्ट्रीय लोक दल के जयंत चौधरी से फाइनल होने के कयास सामने आए ही चुके हैं. अखिलेश यादव अरविंद केजरीवाल के सिपहसालार संजय सिंह से आम आदमी पार्टी से चुनावी गठबंधन को लेकर भी चर्चा कर चुके हैं. आम आदमी पार्टी के साथ-साथ चंद्रशेखर रावण की आजाद समाज पार्टी से भी अखिलेश यादव की पटरी बैठने की उम्मीद की जा रही है. केवल जयंत चौधरी के राष्ट्रीय लोक दल को छोड़ दें तो ये सभी
पार्टियां यूपी में अभी छोटी हैसियत ही रखती हैं.
बीजेपी की किनसे जुड़ी गांठ
अब भाजपा की तैयारियों पर गौर करें तो हमें दिखता है कि उन्होंने भी काफी सारे छोटे दलों से गठबंधन कर लिया है. योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही बीजेपी ने अभी तक शोषित समाज पार्टी, भारतीय सुहेलदेव जनता पार्टी, भारतीय मानव समाज पार्टी, मानव हित पार्टी, मुसहर आंदोलन मंच, पृथ्वीराज जनशक्ति पार्टी और भारतीय समता समाज पार्टी के साथ चुनाव लड़ने की डोर बांध रखी है. भाजपा के छोटे दलों से गठबंधन की परिणाम पहले भी आशा जनक रहे हैं. उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव 2017 में बीजेपी ने अनुप्रिया पटेल के अपना दल और ओपी राजभर (Omprakash Rajbhar) की सुभासपा जैसे छोटे दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और तब उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत भी हासिल हुई थी. भाजपा के इस स्वयं व सिद्ध तरीके को उत्तर प्रदेश के चुनावी रण में हर पार्टी आजमाने को उत्सुक दिखती है. ऐसे हालात में छोटे दलों का उत्साह भी देखते ही बनता है, तभी तो चुनावी खबरों के आसमान में रोज ही किसी छोटे बड़े दल की खबर हमें तैरती नजर आ ही जाती है.
केवल मायावती इस ट्रेंड से अलग
बसपा सुप्रीमो मायावती इस ट्रेंड से अलग चलने का सोच रही हैं. उन्होंने हाल ही में एक बार फिर एलान किया है कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव अपनी दम पर ही लड़ेगी. लखनऊ में अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यह बात कही. उन्होंने कहा कि मैं तो पहले भी कह चुकी हूं और बार-बार कह रही हूं कि बीएसपी उप्र का चुनाव अकेले अपने दम पर लड़ेगी. उनकी इस घोषणा पर यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि जब कोई दल उनके साथ नहीं आ रहा है तो मजबूरी में ही मायावती को ऐसा कहना पड़ रहा है.