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दिल्ली में भूख हड़ताल पर बैठे UPSC की तैयारी कर रहे छात्रो से मोदी सरकार का तानाशाह पूर्ण रवैया

डॉ कौशल कांत अध्यक्ष YFE ने मुलाकात की और कानूनी लड़ाई में सहयोग करने की बात की तथा One Nation One Age Limitation For Any Examination की बात रखी।

संघ सेवा परीक्षा में हिस्सा लेने का एक मौका मांग रहे अभ्यर्थियों के साथ सरकार द्वारा बद्सलूकियो का दौर अब भी जारी है। जबकि आज भूख हड़ताल का आंठवा दिन है
तथा सरकार अभ्यर्थियों के साथ दोगला व्यवहार कर रही है।
सिविल सेवा का सपना लिए दूर दराज़ क्षेत्रो से आये है सैकड़ो युवा सरकार के एक विफल प्रयोग के बलि चढ़ गए इन अभ्यर्थियों का यह कहना है कि नियमो में हुए बदलाव के कारण 2011 से 2015 के दौरान उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। इस बदलाव के कारण जिसे सरकार ने पुनः वापस भी लिया , कई अभ्यर्थियों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे है।
छात्रों का कहना है कि वो सरकार से केवल एक बार परीक्षा में बैठने का मौका मांग रहे है।
ज्ञात हो कि 2011 में यू.पी.एस.सी ने सी-सैट की शुरूवात की थी। इसका गैर इंजीनियरिंग तथा अंग्रेजी के छात्रों की तरफ से विरोध हुआ था। उसके उपरान्त 2015 में सी-सैट को क्वालीफाइंग कर दिया गया लेकिन तब तक इस प्रयोग से लाखो छात्रों के अधिकतम प्रयास की सीमा खत्म हो चुकी थी।
परीक्षा में केवल एक बार बैठने का मौका दिए जाने को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे साहिल से बात करने पर हमे पता चला कि इस इस मुहिम का समर्थन 200 से अधिक सांसद कर रहे है जबकि अधिकांश मंत्रियो की भी इसमें मौन सहमति है।एक तरफ सरकार युवाओ के प्रति सजग होने ढोंग भी करती है दूसरी तरफ सरकार का ऐसा सौतेला व्यवहार काफी चिंतनीय है। अब देखना यह है कि भूख हड़ताल पर बैठे युवाओ की सरकार कब सुध लेती है

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