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यूपी में ग्राउंड वॉटर पॉल्यूशन कम करेगी यह योजना, इन शहरों में होगी शुरुआत

यूपी में ग्राउंड वॉटर पॉल्यूशन को कम करने के लिए प्रदेश सरकार ने एक ऐसी योजना तैयार की गई, जिससे की प्रदेश की नदियों व ग्राउंड वॉटर को स्वच्छ रखा जा सकेगा। शहरी इलाकों में शुरू होने वाली इस योजना के तहत सीवरेज सुविधा से वंचित घरों के शौचालयों के सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले सीवेज का ट्रीटमेंट किया जा सकेगा। सरकार इसके लिए प्रदेश ‘सेप्टेज मैनेजमेंट योजना’ शुरू करने जा रही है। शहरी इलाकों में छोटे-छोटे ‘फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट’ लगाए जाएंगे।

इस योजना के तहत पहले चरण में 31 शहरों का चयन किया गया है। जहां पर प्लांट लगाने के लिए सरकार ने 161 करोड़ 61 लाख रुपये की मंजूरी भी दे दी है। बता दें कि यह योजना देवनहल्ली (कनार्टक), राउरकेला, पुरी (उड़ीसा) व स्याना (महाराष्ट्र) में लागू हो चुकी है। जहां पर इसके काफी बेहतर परिणाम आए हैं। अब इसको देखते हुए यूपी में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर झांसी व उन्नाव में इस तरह के प्लांट लगाने का काम शुरू किया है।

अमृता योजना के तहत शामिल किए गए शहर

क्षेत्रीय नगर एवं पर्यावरण अध्ययन केंद्र (आरसीयूईएस) के अपर निदेशक एके गुप्ता ने बताया कि इस योजना के तहत अमृत योजना में शामिल प्रदेश के 60 शहरों में से 25 शहरों समेत बहुत से ऐसे शहर हैं जहां 25 से 40 प्रतिशत मकान सीवरेज सिस्टम से नहीं जुड़े हैं। जिसकी वजह से अब तक इन शहरों के मकानों में बने शौचालयों के सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले सीवेज के वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण की व्यवस्था नहीं है। अब ऐसे में सेप्टिक टैंकों से सीवेज निकालकर खुले में फेंक दिया जाता है या नालों में डाल दिया जाता है, जो बहकर गंगा आदि नदियों में चला जाता है। इसके चलते भूजल व नदियों में प्रदूषण की मात्रा बढ़ती जा रही है। अब 31 शहरों के लिए ‘सेप्टेज मैनेजमेंट योजना’ मंजूर की गई है। इन शहरों के लिए करीब 182.18 करोड़ की लागत वाली योजना की पहली किस्त के तौर पर राज्य सरकार ने 23.65 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं।

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