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देश के हिंदुओ को संगठित करने का मुद्दा अक्सर उठता रहता है .अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू सेना इस कार्य में महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी निभा ही है इस सन्दर्भ में अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू सेना के अध्यक्ष श्री महंत आदित्य कृष्ण गिरी जी से स्वतंत्र स्वरुप के सहसंपादक प्रफुल्ल गोस्वामी से बातचीत के कुछ अंश

प्रश्न  – आपके अनुसार हिंदुत्व की क्या परिभाषा है   ?

उत्तर – हिंदुत्व भारत के दर्शन के संस्कृति का हिस्सा है  तथा जो भी व्यक्ति भारत देश वर्ष में जन्म लेने वाला हर प्राणी भारतीय संस्कृति से परोक्ष या अपरोक्ष रूप में जुड़ा  हुआ है  चाहे वों किसी  भी धर्म व जाति से हो .

हिंदुत्व एक जीवन दर्शन है तथा ये भारतीय संस्कृति का हिस्सा है जो भी भारत देश का रहना वाला है उसके मूल में हिंदुत्व का अंश

तो विद्यमान होगा ही .हिंदुत्व से जुडी हमारी भृत्य संस्कृति का उदहारण आप ऐसी भी लगा सकते है की जब हम मंदिर गुरूद्वारे या गंगा जी के स्थान के आगे से निकलते है तो उन्हें प्रणाम करके ही निकलते है .यही इसकी विशेषता है .अतः हिंदुत्वा भारत वर्ष में जन्म लेने वाले हर प्राणी का जीवन दर्शन है .

प्रश्न  –    आजकल के आधुनिक युग में  युवाओं मे अपनी संस्कृति के लिए उदासीनता के लिए आप किस को ज़िम्मेदार मानते है  ?

उत्तर –   मै  इस दोष के लिए युवाओ से ज्यादा उनके अभिवावाको को दोषी मानता हू .सबसे पहले एक बच्चा अपनी माँ के संपर्क में आता है फिर पिता तथा फिर परिवार और समाज के संपर्क में आता है तथा एक अच्छे अभिवावक की ये ज़िम्मेदारी होती है की वह अपने बच्चे को भारतीय संस्कृति की विशेषताओ से अवगत कराए  किन्तु  आजकल के भौतिक युग में अभिवावक अपनी इस ज़िम्मेदारी का निर्वाह कुशलता से नही कर पा रहे है .बच्चे अपने बड़ो से ही संस्कार ग्रहण करते है तथा जैसा बड़े करते है वों उसका अनुकरण करते है पहले बच्चो का जो समय दादा –दादी , नाना –नानी  के साथ व्यतीत होता था उसका स्थान अब मोबाइल तथा वीडियो गेम ने ले ली है . जो पहले हमारी सामूहिक परिवार की व्यवस्था थी की सब लोग साथ में नाश्ता तथा रात्रि का भोजन  करते थे एवम आपस में विभिन्न महत्वपूर्ण पहुलओ पर बात करते थे . पूरा दिन बड़ो की देख रेख में अनुशासन में बीतता था जिससे हमारी मनोवैज्ञानिक ज्ञान तथा भारतीय संस्कृति की समझ बढती थी .

 

प्रश्न – युवाओ को प्रगति पथ पर आगे बढ़ने के लिए आपने अनुसार क्या करना चाहिए  ?

उत्तर –      आजकल के युवाओ को पुरुषार्थ का ज्ञान होना अतिआवश्यक है तभी वह राष्ट्रनिर्माण में अपना योगदान दे सकते है . पुरुषार्थ का ज्ञान शास्त्रों से होगा जब भी खाली समय मिले शास्त्रों का अध्ययन करना चाहिए जिसके द्वारा उनके अंदर संस्कृति के मूल ज्ञान का संचार हो .

 

 

 

प्रश्न  – युवाओ के चरित्र निर्माण हेतु प्रेरित करने के लिए  आपके अनुसार कोई आदर्श  व्यक्ति जिससे वह प्रभावित हो सके  ?

उत्तर –     मेरे अनुसार किसी को आदर्श मान लेने से हम अपने गुणों के विकास को एक परिधि में बाँध देते है  क्योकि जब हम किसी को अपना आदर्श मानते है तब हम उस आदर्श व्यक्ति के कुछ गुणों को ही अपने जीवन में ग्रहण करते है जबकि  एक मनुष्य स्वयं कई  प्रकार की उर्जाओ का भण्डार होता है .मनुष्य का जीवन सूक्ष्म नहीं है उसका जीवन वृहद है . मनुष्य को शास्त्रों को अपना आदर्श मानना चाहिए

शास्त्रों का ज्ञान नवयुवको को सही पथ दिखाकर उनको पुरुषार्थ प्राप्त करने हेतु सहायक है .यही हिन्दू दर्शन का अभिप्राय है .

 

 प्रश्न  – आप अंतरराष्ट्रीय हिन्दू सेना के अध्यक्ष है .आप अपनी संस्था द्वारा चलायी जाने वाली जनकल्याणकारी योजनाओ के बारे  में बताये  ?

उत्तर –       हमारी संस्था द्वारा गरीब परिवारों की बेटियों का विवाह समय समय पर पूरे विधि विधान के साथ संपन्न कराया जाता है .आज के समय जो हिन्दू समाज की सबसे बड़ी समस्या है कि हिन्दू समाज जातियों मेंबटा  हुआ है जिसका फायदा विभिन्न राजनितिक दल समय समय पर उठाते है हम उस समस्या पर कार्य कर रहे है तथा हिन्दू समाज को संगठित करने का कार्य कर  रहे है .

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