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मानव  प्राण रक्षा का अनूठा प्रयास –  जीवन रक्षण समित

मानव  प्राण रक्षा का अनूठा प्रयास –  जीवन रक्षण समित

आज के दौर में एक देश के लिए एक मजबूत सेना का होना कितना जरूरी है इससे हम भलीभाती परिचित  है .सेना के हर जवान सीमा पर पूरी मुस्तैदी के साथ देश सुरक्षा में तैनात है  तथा वह राष्ट्र धर्म निभाते हुए देश रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने में भी झिझक नहीं करते है .

सेना के जवान तथा आर्मी ऑफिसर केवल सीमाओं पर ही नहीं अपितु देश के भीतर भी अपने राष्ट्र धर्म का निष्ठा से पालन करते है ऐसा ही एक उदहारण हमें  पुर्व उपसेना प्रमुख निरंजन  सिंह मलिक में देखने को मिलता है .

उन्होंने पूरी निष्ठा तथा लगन से लगभग 40 वर्ष थल सेना में अधिकारी के रूप में कार्य  किया तथा सेना के उच्च पदों पर रहकर  अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन किया तथा परम विशिष्ट पदक से सुशोभित हुए .

इन सबसे भी अच्छी बात उनके विषय में यह है कि सेवा निवर्त होने के बाद भी वह देश सेवा में अपना महत्वपूर्ण समय दे रहे है .

कुछ समय पहले दिल्ली में एक स्कूल बस यमुना नदी में गिर गयी .जिसमे अनेको बच्चो की जान चली गयी थी .इस घटना ने  निरंजन जी को काफी प्रभावित किया उन्होंने घटनास्थल का निरिक्षण किया

उन्होंने वहाँ जाकर ये जाना की दुर्घटना के समय अगर बच्चो को प्राथमिक उपचार दिया जाता तो काफी बच्चो की जान बचायी जा सकती थी .

तभी से उन्होंने आम लोगो को जागरूक करने का निर्णय किया . इसके लिए उन्होंने इंग्लैंड की रॉयल लाइफ सेविंग सोसाइटी का दौरा किया . उसके बाद वह भारत वापस आ गये .

वापस आकर उन्होंने इस कार्य को करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जिसे हम आज  “ जीवन रक्षण समिति”  के नाम से जानते है .

जिसकी शुरुआत  उन्होंने इंग्लैंड की रॉयल लाइफ सेविंग सोसाइटी को देखने के बाद  2004 में की .इसका हेडक्वार्टर पुणे में स्थित है  .

निरंजन  सिंह मलिक जी  के द्वारा बनाई गयी इस समिति का मूल उद्देश्य  किसी व्यक्ति की  म्रत्यु होने जैसी आपात स्थिति से बचाना है  तथा उसको तुरंत सहायता उपलब्ध करना है

जीवन रक्षण समिति की टैग लाइन  “सक्षम हाथ कुशलता के साथ ”  है .  समिति का मुख्य उद्देश्य हर व्यक्ति को किसी मुश्किल  में फसे हुए व्यक्ति को परेशानी से बचने हेतु प्रशिक्षित करना है .

यातायात के साधनों में फर्स्ट ऐड किट होना जरूरी है लेकिन उससे भी जरूरी यह है की उसका प्रयोग कैसे करना है .

दिल्ली में संपन्न हुए कॉमनवेल्थ गेम देश विदेश के खिलाडियों को ला जाने वाले ड्राइवरों को समिति ने वृहद रूप से प्रशिक्षण दिया था .जिससे काफी जागरूकता फैली थी तथा ये कार्यक्रम काफी सराहा गया था .

मलिक जी  ने  इस समिति के उद्देश्य को पूरा करे के लिए दिन रात मेहनत की है .उनको काफी चुनौतियों को सामना करना पड़ा.

सरकारी संस्थानों के अलावा उन्होंने प्राइवेट सेक्टर के स्कूलों में भी ट्रेनिंग  प्रोग्राम दी है .

जनहित के इस कार्य को आगे बढ़ने के लिए  वह प्रतिबद्ध है . इस उम्र में भी उनकी इस जनहित कार्य के लिए समर्पण देखते ही बनता है .

उन्हें अपनी बात को लोगो को समझाने में काफी परेशानी हुई  ,उदाहरणतः अगर कोई व्यक्ति किसी दुर्घटना ग्रस्त व्यक्ति को अस्पताल पहुचता है तो सबसे पहले पुलिस अस्पताल लेन वाले व्यक्ति से पूछताछ करती है .

देश में 2014 में आये हुए आकड़ो के अनुसार लगभग 316000 व्यक्ति दुर्घटना में अपनी जान गवा चुके है .सड़क दुर्घटना में 16 जाने हर घंटे जाती है .उनमे से अधिकांश 45 वर्ष से कम आयु के होते है .इतने नौजवानों की  इस तरह दुर्घटना में मृत्यु हो जाना देश के लिए पीड़ादायक है .

दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों  की जान बच सकती थी अगर वहन पर मौजूद लोग अपने अच्छे नागरिक होने की ज़िम्मेदारी का वहन करे .तथा सामान्य जीवन रक्षण बचाव तकनीक जानते हो .

जब कोई व्यक्ति दुर्घटनाग्रस्त हो जाये तब उसे वहां पर मौजूद लोगो से मदद की प्राथमिक आवश्यकता होती है .इस मदद को प्राथमिक उपचार कहते है .जो डॉक्टर तथा एम्बुलेंस के आने के पहले दी जाती है .

जीवन रक्षण तकनीक एवम प्राथमिक उपचार किसी व्यक्ति की आपातकालस्थिति से निपटने में सबसे ज्यादा सहायक है .इसी लिए यह कथन बिलकुल सही है  “Lives are primarily saved at the accident site”. दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के लिए दुर्घटना के तुरंत बाद का समय जीवन रक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण  होता है  तथा अगर दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के आसपास ऐसे व्यक्ति हो जो जीवन रक्षण तकनीक जानते हो तो दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति का जीवन बचाया जा सकता है .

जीवन रक्षण समिति का मुख्य उद्देश्य देश के हर नागरिक को जीवन रक्षण तकनीक में प्रशिक्षित करना है .

जीवन रक्षण समिति इस समय केंद्र सरकार तथा कई प्रदेशो की सरकारों के साथ काम कर रही है . वह सरकार के तमाम विभागों में काम कर रहे कर्मचारियों को जीवन रक्षण तकनीक में  प्रशिक्षित कर रही है .जीवन रक्षण समिति इस समय दिल्ली मेट्रो में प्रशिक्षण का कार्य कर रही है .

जीवन रक्षण तकनीक की जानकारी रखने वाला व्यक्ति किसी दुर्घटना में फसे हुए व्यक्ति के लिए वरदान से कम नहीं है .

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